कहते हैं शराब में वो नशा होता है कि एक बार चढ़े तो आसानी से नहीं उतरता. एक बार मरजानी मुंह लगी नहीं कि इर तो सर चढ़ कर बोलती है. लेकिन क्या कभी सुना है कि नशा चढ़ा हो बाप पर लेकिन टुन्न हो जाए बेटा. बात बड़ी अजीब सी लगती है लेकिन वेस्ट यूपी में पिछले हफ्ते घटी घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो ये बात सोलह आने सच नजर आती है कि बाप की सत्ता का नशा बेटों और रिश्तेदारों को टुन्न किए जा रहा है.
मुजफ्फरनगर से विधायक शाहनवाज राणा के चचेरे भाइयों शाह्बेज राणा और सद्दाम राणा द्वारा दिल्ली- देहरादून हाइवे पर दिल्ली की युवतियों से दुराचार का प्रयास करने का मामला ज्यादा पुराना नहीं है.
बीती आठ जुलाई को सहारनपुर में विधायक के बेटे ने एक ऐसी सनसनी खेज वारदात को अंजाम दिया जिसे देख सुनकर आप दाँतों तले उंगली दबा लेंगे. बसपा एमएलसी एवं उत्तराखंड बसपा अध्यक्ष डॉक्टर मेघराज जरावरे का बेटा अपने साथियों के साथ फ़िल्मी स्टाइल में मंडप में दुल्हन उठाने पहुंच गया. हालांकि बाद में उसे गिरफ्तार किया गया. लेकिन उसकी इस करतूत से दुल्हन की शादी टूट गई.
माना आजकल फ़िल्में देखकर हर युवा के मन में हीरो बनने की, उसी की तरह के स्टंट करने की ख्वाहिश रहती है लेकिन इतनी हिम्मत कोई नही कर पाता कि हकीकत में ऐसे कारनामों को अंजाम दे सके. ये नतीजेतन बाप की सत्ता का ही नशा है जो बेटे के सर चढ़ कर बोल रहा है.
इस घटना की चर्चाएं भी अभी ख़त्म नहीं हुई थीं कि मेरठ में एक ऐसी ही घटना फिर हुई. मेरठ में अधिकतर व्यस्त रहने वाले वेस्ट एंड रोड पर एक बसपा नेता को जाम में फंसने पर इतना गुस्सा आया कि उन्होंने एक बाइक सवार युवक पर पिस्टल तान दी. इतना ही नहीं सिपाहियों ने जब उसे एसा करने से रोका तो वह उनसे भी मार पीट पर उतारू हो गया.
इससे भी शायद नेताओं ने सबक नहीं लिया ठीक 11 जुलाई को एक नेता के भतीजे पर फिर सत्ता का नशा सर चढ़कर बोला. टोल प्लाजा पर फ्री पास मांगनाइस भतीजे को इतना नागवार गुजरा कि उसने टोल प्लाजा पर जम कर तोड़-फोड़ कर डाली.
यह तो सिर्फ पिछले कुछ दिनों में लगातार घटी कुछ घटनाएं ही हैं. अगर पूरे साल के आंकड़े इकट्ठे किए जाएं तो इस सत्ता की गर्मी ऐसी ही है. लेकिन इसे सिर्फ सत्ता की गर्मी कहना सही नहीं है. यहां काफी दोष परवरिश का भी है. नेताओं पर पद पाते ही यह असर होता है कि सत्ता का उड़नखटोला कब उन्हें फर्श से अर्श पर ले जाता है उन्हें खुद भी पता नहीं चलता और इस उड़न खटोले की हवा उनके रिश्तेदारों को खुद बी खुद गर्म करने लगती है.
सवाल यह है कि इसके लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए. हालांकि विधायक के चचेरे भाइयों और दुल्हन उठाने के प्रयास के आरोपी विधायक के बेटों की गिरफ्तारी सबक लेने के लिए अच्छा उदाहरण है लेकिन फिर भी यदि इन भाई-भतीजों के सिर से नशा नहीं उतरा तो उंगली टेढ़ी करना जरुरी है. सिर्फ पुलिस को नहीं बल्कि इन नेताओं को भी. अभी तो यह टुन्न बेटे न तो पुलिस को कुछ समझ रहे हैं और न ही जनता को और न जी समाज के नियमों को, इससे पहले कि वो समय आए कि ये नशेखोर अपने बापों को भी कुछ समझना बंद कर दें, इन पर लगाम लगाना जरुरी है.
या तो ऐसे कानून बनें या सरकार इन नेताओं को सख्त निर्देश दे कि वो अपने रिश्तेदारों को संभालकर रखें. इसका एक उपाय नेता को पद देने से पहले एसा न करने की शपथ दिलाई जाए. बहरहाल उपाय जो भी हो ऐसे लोग जो सत्ता का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हें सत्ता रौब दिखाने का रास्ता दिखती है इनसे सावधान रहने की जरुरत है.
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